हरिश्रृंगार फूल के पत्ते/Green leaves

प्रिय मित्रों जय श्रीकृष्णा, राधे राधे.....



       हरिश्रृंगार -   झाड़ीनुमा या छोटा पेड़ कहा जा सकता है। इसके वृक्ष की ऊँचाई लगभग दस मीटर तक होती है। इसके पेड़ की छाल जगह जगह परत दार स्लेटी रंग की होती है एवं पत्तियाँ हल्की रोयेंदार छह से बारह सेमी तक लंबी और ढाई से.मी. तक चौड़ी होती हैं। हरिश्रृंगार के पेड़ पर रात्रि में खुशबूदार छोटे छोटे सफ़ेद फूल आते है, और एवं फूल की डंडी नारंगी रंग की होती है, प्रातःकाल तक यह फूल अपने आप ही जमीन पर गिर जाते है। इसके फूल अगस्त से दिसम्बर तक आते है।

हरिश्रृंगार के औषधीय प्रयोग :-

गैस एवं वायु विकार को दूर करने मेः-
      गैस एवं वायु विकार जैसे असह्य रोग से छुटकारा पाने तथा पाचन शक्ति बढाने हेतु हरिश्रृंगार के 7 से 8 पत्तों को पीसकर एक कप पानी मे घोल बनाकर चाय की तरह चुस्की ले लेकर पीने से गेस, वायु विकार तथा पाचन क्रिया मे लाभ पहुँचाता है।

सायटिका (गृध्रसी ) :-

            दो कप पानी में हरसिंगार के 8-10 पत्तों के छोटे-छोटे टुकड़े करके डाल लें, इस पानी को धीमी आंच पर आधा रह जाने तक पकाएं। ठंडा हो जाने पर इसे छानकर पिये। इस काढ़े को दिन में दो बार – प्रातः खाली पेट एवं सायं भोजन के एक डेढ़ घंटा पहले पियें। इस प्रयोग से सायटिका रोग जड़ से चला जाता है। इस काढ़े का प्रयोग कम से कम 8 दिन तक अवश्य करना चाहिए।

हरिश्रृंगार फूल के पत्ते/Green leaves




गठिया रोग :-

      हरिश्रृंगार के पांच पत्तों को पीसकर घोल लें, इस घोल को एक गिलास पानी में मिलाकर धीमी आंच पर पकाएं | जब पानी एक चौथाई रह जाये तब इसे पीने लायक ठंडा करके पियें | इस काढ़े का सेवन प्रातः खाली पेट पियें। इससे वर्षों पुराना गठिया के दर्द में भी निश्चित रूप से लाभ होता है।

बबासीर :-

        बबासीर के लिए हरसिंगार के बीज रामबाण औषधि माने गए हैं इसके एक बीज का सेवन प्रतिदिन किया जाये तो बवासीर रोग ठीक हो जाता है। यदि गुदाद्वार में सूजन या मस्से हों तो हरसिंगार के बीजों का लेप बनाकर गुदा पर लगाने से लाभ होता है।

गंजापन :-

    हरिश्रृंगार के बीजों को पानी के साथ पीसकर लेप बना लें। इस लेप को 30 मिनट तक गंजे सिर पर लगायें। इस प्रयोग को लगातार 21 दिन तक करने से गंजेपन में अत्याधिक लाभ होता है।

हरिश्रृंगार फूल के पत्ते/Green leaves


ज्वर :-

      इस काढ़े को विभिन्न ज्वर जैसे – चिकनगुनिया का बुखार, डेंगू फीवर, दिमागी बुखार आदि सभी प्रकार के ज्वर में अत्यंत लाभ मिलता।

मलेरिया :-

      मलेरिया बुखार होने पर 2 चम्मच हरिश्रृंगार के पत्ते का रस,   2 चम्मच अदरक का रस,   2 चम्मच शहद आपस में मिलाकर प्रातः सायं सेवन करने से मलेरिया के बुखार में अत्यधिक लाभ होता है।

स्त्री रोग :-
      हरिश्रृंगार की 7 कोंपलों (नयी पत्तियों) को पाँच काली मिर्च के साथ पीसकर प्रातः खाली पेट सेवन करने से विभिन्न स्त्री रोगों में लाभ मिलता है।

त्वचा रोग :-

      हरिश्रृंगार की पत्तियों को पीसकर लेप बना लें। इस लेप को त्वचा पर लगाने से त्वचा से सम्बंधित रोगों में लाभ मिलता है। त्वचा रोगों में इसके तेल का प्रयोग भी उपयोगी है।


बालों की रूसी :-

        50 ग्राम हरिश्रृंगार के बीज पीस कर 1 लीटर पानी में मिलाकर बाल धोने से रुसी समाप्त हो जाती है। इसका प्रयोग सप्ताह में 3 बार करें।

पेट के कीड़े :-

       प्रातः,दोपहर एवं सायंकाल एक चम्मच हरसिंगार के पत्तों के रस में आधा चम्मच शहद मिला कर चाटने से पेट के कीड़े समाप्त हो जाते हैं। इस प्रयोग को कम से कम तीन दिन तक करना चाहिए।

ह्रदय रोग :-

        हरिश्रृंगार के फूल हृदय के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं हैं। एक माह तक प्रातः खाली पेट हरसिंगार के 15-20 फूल या फूलों का रस का सेवन हृदय रोग से बचाता है।

स्वास्थ्य रक्षक :-

     स्वस्थ व्यक्ति भी यदि सर्दियों में एक सप्ताह तक हरिश्रृंगार के पत्तों का काढ़ा पियें तो शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढती है एवं शरीर यदि किसी प्रकार का संक्रमण हो रहा है तो वह भी समाप्त हो जाता है।

अस्थमा :-

       अस्थमा की खांसी में आधा चम्मच हरिश्रृंगार के तने कि छाल का चूर्ण पान के पत्ते में रखकर चूसने से लाभ मिलता है। इस प्रयोग को दिन में दो बार करना चाहिए।

सूखी खांसी :-

        हरिश्रृंगार की 2-3 पत्तियों को पीस कर एक चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करने से सूखी खाँसी ठीक हो जाती है।

मांसपेशियों का दर्द :-

      2 चम्मच हरसिंगार के पत्तो का रस एवं 2 चम्मच अदरक का रस आपस में मिलाकर प्रातः खाली पेट पीने से मांसपेशियों का दर्द समाप्त हो जाता है।

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सौन्दर्य वर्धक :-

      हरसिंगार के फूलों का पेस्ट   मैदा को दूध मिलाकर उबटन बना लें, शरीर पर लेप करने के 30 मिनट बाद स्नान कर लें। इस प्रयोग से त्वचा में निखार आता है।

विशेष :-

         विभिन्न आयुर्वेदाचार्यों के अनुसार वसन्त ऋतु में हरसिंगार के पत्ते गुणहीन रहते हैं अतः इसका प्रयोग वसन्त ऋतु में लाभ नहीं करना चाहिए।

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आपका अपना - पं0 रमाकान्त मिश्र
                  कोइरीपुर सुलतानपुर
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