प्रिय मित्रों जय श्रीकृष्णा श्री राधे-राधे 

एक भावनात्मक सत्य कहानी

माँ की असली पहचान



         मां की मौत के बाद जबवी भी हो गई तब नाम आंखों से चारु ने अपने भाई से विदा ली।


          "सब काम खत्म हो गया भैया माँ चली गई अब मैं चलती हूँ भैया!" आंसुओं के कारण उसके मुंह से सिर्फ इतना ही निकला।


       "रुक चारु अभी एक काम तो बाकी रह गया... ये ले माँ की अलमारी और जो सामान चाहिए तू ले जा!" एक चाभी पकड़े गए भैया बोले।


        "नही भाभी ये आपका हक है आप ही खोलिये !" चारु भाभी को पकड़ते हुए बोलीं। भाभी ने भैया के एंटरप्राइज़ पद पर पार्टी की सदस्यता ली।


माँ की असली पहचान


         "देखिए ये मां की अनमोल ऊंचाई, कपड़े जो ले जाना चाहते हैं मां की नापसंद बेटी का हक सबसे ज्यादा होता है!" भैया बोले।


        "भैया पर मैं तो हमेशा यहां इन गहनों, कपड़ो से कीमती चीज देखना है मुझे तो वही चाहिए!" चारु बोली।


         "चारु हमने माँ की अलमारी को हाथ तक नहीं लगाया जो तेरे सामने है तू किस अनमोल चीज़ की बात कर रही है!" भैया बोले।

माँ की असली पहचान

         "भैया इन स्टेटस कपड़ो पर तो भाभी का हक है क्योंकि वो मां की सेवा बहू नहीं बेटी बनती है। मुझे तो वो कीमती सामान चाहिए जो हर बहन बेटी जैसी दिखती है!" चारु बोली।


       "मैं समझ गया कि लड़की तुम्हें किस चीज़ की चाह रखती है। दीदी तुम फ़िक्र मत करो माँजी के बाद भी तुम्हारा ये माका हमेशा के लिए ही रहेगा! पर फिर भी माँजी की पहचान कुछ तो ले लो!" भाभी भरी आँखों से बोली तो चारु ने अपना गला लटका लिया।


       "भाभी जब मेरा मायका जीवित है तो मेरा भाई भाभी के रूप में मुझे फिर से किसी तरह की उंगली की ज़रूरत है तो मैं ये मॉकलेट शुरू करता हूं मेरे प्रॉमिस की तस्वीरें ले जाना चाहता हूं जो मुझे हमेशा पता चलता है कि मेरी मां अच्छी नहीं है मेरा मायका है!


     चारु पूरे परिवार की तस्वीरें अंकित बोली और नाम आंखों से विदा ली सबसे......…


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आपका अपना - पं0 रमाकान्त मिश्र
                  कोइरीपुर सुल्तानपुर